अहसास..,

क्यों लगती है बुरी,
तुम्हारी चिल्ला कर कहना कोई बात,
शायद ये नहीं थी कभी उम्मीद तुमसे,
क्योंकि प्यार करने वाले चिल्लाते नहीं कभी।

दर्द तो होता हैं दिल में,
अहसास भी रोता हैं कभी कभी,
पर इस दर्द को ज़बान नहीं दे सकता मैं,
क्योंकि शायद यक़ीन नहीं मुझे अपने आप पर।

कुणाल कुमार

मारने मारने की बातें नहीं करते अच्छे लोग,
इसलिए तो जीने का आनंद उठाते हैं सच्चे लोग।

सच…

झूठ कितना भी चिल्ला ले,
दिन रात हल्ला मचा ले,
सच को झूठ का जामा पहना दे,
पर सच को नहीं दफ़ना सकता हैं कोई।

समय की कसौटी पर,
परखा जाएगा सच और झूठ,
सच तो निखर कर वापस आएगा,
पर झूठ वही दम तोड़ जाएगा।

मेरी मानो दो सच का साथ,
क्षणिक दुःख से ना घबराओ इंसान,
क्योंकि झूठ की क्षणिक सुख,
देता है बाद में असीम दुःख।

कुणाल कुमार

समझ नहीं आता…

शायद मेरी चाहत,
अपने नसीब पर रो रहा,
तुम्हें ख़ुश देखने के लिए,
खुद को खुद से भूल रहा।

भरोसा था खुद पर कभी,
शायद खुद को समझा पाऊँगा कभी,
पर आज तुम्हें अपनी दुनिया मे उलझा देख,
खुद के भरोसा पर शक हो रहा।

समझ नहीं आता मुझे,
अब जीने के लिए क्या करूँ,
तुम तो मेरी दुनिया बन गयी,
पर मैं नहीं जगह बना पाया तुम्हारे दिल में कभी।

पर आज तुम्हारी ज़िद्द के लिए,
मैंने अपनी चाहत को दिल में दफ़ना,
दिल से रोता हुआ मैं,
चुप। चाप जीवन जी रहा।

कुणाल कुमार

काफ़ी कुछ हैं कहना

काफ़ी कुछ हैं कहना,
पर मुझे आज चुप ही हैं रहना,
जब समझने वाले नासमझी से परखे,
तो नासमझ बनकर ही हैं मुझे रहना।

ज़िंदगी के कुछ लम्हे ऐसे हैं,
जो दिल के द्वारा लिखे गए,
अश्रुओं के स्याही में डुबो कर,
प्यार के पन्ने पर दर्द के नज़्म लिखे गए।

शायद मेरा प्यार नहीं देखा दर्द,
जितना दर्द तुमने सहे हैं,
प्यार करता हैं दिल तुम्हारा,
पर इकरार ना करने का दर्द तुमने सहे हैं।

कुणाल कुमार

बेचैन…

क्यों बेचैन हैं मन,
किसी ख़ास के याद में,
क्या दिल में बसे प्यार की,
या दर्द है मेरे इंतज़ार की।

शायद मैंने सोचा ना था,
निश्वर्थता हैं प्यार की परीक्षा,
प्यार करता हूँ तुमसे,
पर जीवन की परीक्षा दे रहा तुम्हारे बिना।

शायद ये मेरी स्वार्थ है,
जो दूरी बना ली हैं खुदसे,
क्योंकि मेरे स्वार्थ से ज़्यादा,
महतव्यपूर्ण हैं मुझे अपनों की ख़ुशी।

कुणाल कुमार

काल चक्र..,

नसीब मेरा काल चक्र में फँस,
भावनाओं के गहराई में डूब रहा,
चेहरे पे लिए झूठी हँसी मैं,
अपने दर्द को यादों में बदल रहा।

ये अच्छा है की यादें,
नहीं बनती है दर्द की सबब,
मीठी सी अहसास लिए,
देती है जीवन को जीने का लक्ष्य।

कुणाल कुमार

समझदारी की कमी…

कुछ लोग होते हैं,
जो खुद को समझदार समझते है,
अपनों को समझना छोड़ कर,
अपनों के जीवन को निग्रह कर लेते है।

हर बात पे समझदारी झाड़ते,
दिखाते उन्हें हैं सम्पूर्ण ज्ञान,
पर जहां समझदारी दिखाना था उन्हें,
वहाँ मूक दर्शक बन कर रहते हैं।

देखा है मैंने उन्हें क़रीब से,
जीते है वो सिर्फ़ अपने बनाई अनुभूति में,
सच नकारते है वो अपने बनाए सोच से,
क्योंकि सच का सामना नहीं कर सकते है वो।

उन्हें जब इज़्ज़त से इज़्ज़त मिले,
और प्यार से बढ़कर प्यार,
समझदारी उनकी खो जाती हैं,
और खो बैठते है वो अपनों को।

कुणाल कुमार

नारी तेरी हैं अजब कहानी

नारी तेरी हैं अजब कहानी,
कहते है तूँ समझदारी में है सयानी,
बुद्धिमता में भी तूँ हैं अद्वित्या की निशानी,
पर अपनों की परख में तूँ है अभी अज्ञानी।

जब मिलती हैं प्यार तुम्हें,
हज़म नहीं कर पाती हो उसे अपने दिल से,
शक्की सा ढूँढती हो मतलब,
अपने सोच के बनाए परिदृश्य से।

मैंने ढूँढ लिया मैंने एक बेहतरीन जगह,
मेरे यादों के पन्ने में लिया है आपको सहेज,
अपने बीते हुए लम्हों को शब्दों में पिरो,
आपके अस्तित्व को किया मैंने खुद में समावेश।

कुणाल कुमार

Disxlaimer – it’s writer personal view, not geneeal.

प्यार…

प्यार का उद्देश्य पाना नहीं,
निभाना होता है दिल के क़रीब लम्हों में भर प्यार,
क्योंकि पाने की चाहत तो सबमें होती हैं,
पर निभाने की ताक़त सिर्फ़ अपनों में होती हैं।

जनता हूँ प्यार नहीं हैं आपके दिल,
पर निभा रहा हूँ साथ लिए ख़्वाब में मंजिल,
कुछ आस है जो सिर्फ़ हैं मेरे दिल के पास,
इसीलिए दिल को रोक रखा होने से उदास।

आपका प्यार मेरे दर्द कि सबब बन रही है,
वही आपका प्यार मेरे जीने का सबब भी हैं,
खोज रहा हूँ वो पल जब खुद को समझ पाऊँ,
या वो पल जब मैं तुमको थोड़ा समझ पाऊँ।

कुणाल कुमार

लम्हे…

कुछ लम्हे यादों में,
मीठी सी अहसास छोड़ जाते है,
जो आपके अपने ना होते हैं,
वो भी यादों के पन्ने पे अपने बन जाते है,

शायद चंद लम्हे,
यादों के पन्ने में लिया है खुद को सहेज,
मैंने उन बीते हुए लम्हों को शब्दों में पिरो,
आपके अस्तित्व को किया मैंने खुद में समावेश।

कभी आपको भी याद आएगा,
उन लम्हे की जब थी मेरे साथ,
पर मैं ख़ुश हूँ की मैंने कड़वाहट नहीं छोड़ी आपके दिल,
अब आपके यादें में तो लिखे होंगे अच्छे पल मेरे नाम।

प्यार का उद्देश्य पाना नहीं,
निभाना होता है दिल के क़रीब लम्हों में प्यार भर,
क्योंकि पाने की चाहत तो सबमें होती हैं,
पर निभाने की ताक़त सिर्फ़ अपनों में होती हैं।

कुणाल कुमार

शायद…

शायद मैंने सोचा ना था,
निश्वर्थता हैं प्यार की परीक्षा,
प्यार करता हूँ मैं अपने दिलों जान से,
पर जीवन की परीक्षा दे रहा यहाँ अकेले।

खुद को समेट लिया खुद में,
अरमान को सुला लोरी सुना अहसास का,
भूल बैठा कैसे काटना हैं आगे की मंजिल,
बस काट रहा हूँ दिन लिए ख़्वाब आपकी अपने दिल।

चाहत थी बस आपके प्यार की,
मेरी हर साँसे आपकी क़र्ज़दार थी,
आपके साथ मैंने अपनी सुबह और शाम देखी,
पर आपने मेरे ख़्वाबों को कर दी अनदेखी।

कुणाल कुमार

कुछ ख़ास…

अनजाने बन कुछ ख़ास,
दिल के क़रीब आ जाते हैं,
पास आते तो है वो अपना बन,
पर साथ निभाने के डर से छोड़ चले जाते है।

शायद उनकी समझदारी हैं ये,
क़रीब हुए भी तो दिल में ख़ुदगर्ज़ी की सोच लिए,
हमने तो चाहा था उन्हें अपना समझ कर,
पर उन्होंने ठुकराया मुझे अपने ख़ुशी के लिए।

चलो अच्छा हुआ विश्वास टूटा,
सच्चाई की परख नहीं कर पाया मैं,
पर विश्वास टूटते टूटते मैं टूट गया,
पर ना छूट पाया दिल से किया गया प्यार तुम्हें।

कुणाल कुमार