कुछ दर्द ऐसे भी…

कुछ दर्द ऐसे भी होते हैं,
जो हम लफ़्ज़ों में बयान नहीं कर सकते,
प्यार तो करते हैं हम उनसे,
पर नाम लेने का हक़ भी नहीं रखते,

कुछ दर्द ऐसे भी होते हैं,
आँखों से अश्रु बन निकल जाते हैं,
पूछे जाने पे क्या ग़म हैं,
कहते आँखों में धूल चली गयी हैं।

कुछ दर्द ऐसे भी होते हैं,
जो यादों के गलियों में हमें छोड़ आते हैं,
उनके दिए अहसास को याद कर,
इस दर्द से नफ़रत भी नहीं कर पाते हैं हम।

कुछ दर्द ऐसे भी होते हैं,
जिसे महसूस कर दिल खिल जाते हैं,
आप तो हमें छोड़ कर चली गयी,
पर ये दर्द आपकी अहसास याद दिलाती हैं।

कुणाल कुमार
Insta: @madhu.kosh

तुम…

तुम पास होती हो तो,
खुद को भूल जाता हूँ,
तुम्हारी अहसास को महसूस कर,
जीवन जीने का सुख पता हूँ।

जब तुम छोड़ कर जाती हो,
तुम ही तुम नज़र आती हों,
तुमसे दूर रहकर भी मैं,
तुम्हें ही अपने क़रीब पता हूँ।

शायद ये हैं मेरी नादानी,
जो तुमसे दिल लगा बैठा मैं,
अब जब दिल लग ही गया है तुमसे,
फिर तुम्हें कैसे भूल सकता हूँ मैं।

कुणाल कुमार

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मेरा सपना…

एक छोटा सा सपना,
जो देखा हैं मैंने दिल से,
दूर अनजाने सहर मे,
एक घर हो मेरे दिल की दर्पण।

घर जहाँ मिले प्यार,
और साथ अपनों का,
शांति भरा जीवन हो,
और तुम रहो सिर्फ़ बनकर मेरी।

करूँ ढेर सारी बातें,
बाँट लूँ बीते हर लम्हे,
सोच से आगे बढ़कर,
जी लूँ दिल की कहीं।

क्या थाम सकोगी मेरा हाथ,
बनकर मेरा हमसफ़र,
या तुम भी औरों की तरह,
सिर्फ़ सोचोगी अपने लिए।

कुणाल कुमार

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नक़ाब…

नक़ाब पहन कर यहाँ,
निकले है अनेक,
छोटी सी सच्चाई के थपेड़े से,
उतर गयी उनकी बेशर्मी भरी शराफ़त।

झूठ बिकता हैं यहाँ,
सच्चाई के नक़ाब पहनकर,
हैवानियत बिकता है यहाँ,
इंसानियत की नक़ाब पहनकर।

नक़ाब की खासियत भी हैं थोड़ी सी,
जैसे छिपा लिया करता हूँ खुद को,
हँसी के नक़ाब के पीछे,
दर्द दिखेगा सभी को तो हसेंगे जमाने के लोग।

कुणाल कुमार

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चाँद की मासूमियत..,

दूर गगन में गम्भीर चाँद,
मासूम सा दिख रहा,
कभी चेहरे को बादल में छिपा,
कभी हँसी से हमें देख रहा।

इस लुका छिपी में,
सोचो चाँद क्या कर रहा,
अपने दर्द को बादल में छिपा,
सभी को अपने हँसी में ख़ुशी दे रहा।

जीवन भी कुछ इस तरह काटो,
अपनी हँसी को तुम हमेशा बाँटो,
दर्द को अपने भीतर छिपा कर,
अपनों के अहसास में जीवन काटो।

कुणाल कुमार

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तमन्ना दिल की कहीं…

तुम्हारी इस नादानी का क्या करूँ,
जो दर्द हर मौक़े पे दे रही हैं मुझे,
शायद नहीं पहचान पायी तुम मेरे प्यार के गहराई,
जो है सिर्फ़ तुम्हारे लिए।

बस यहीं तमन्ना दिल लिए धड़क रहा मेरा दिल,
एक बार मुझे तुम मेरी नज़र से देख लो जड़ा,
सागर सी भावनाएँ उमड़ रही दिल में मेरे,
और अकेला मैं कश्ती में कर रहा तेरा इंतज़ार।

समय बीत रहे होकर घोड़े पे सवार,
पर आज भी मैं वही हूँ कर रहा तेरा इंतज़ार,
सोचता था कभी तुम अपनाओगी मुझे,
पर तुम मुझे छोड़, चली किसी बेहतर के पास।

तुम्हें हक्क हैं अपना प्यार ढूँढने का,
वैसे भी भावुकता किधर है तुममें बसी,
दिल का कद्र उसे क्या पता,
जो सिर्फ़ और सिर्फ़ सुने खुद कि कही।

कुणाल कुमार

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कैसी है ये बेबसी…

कैसी हैं ये बेबसी,
चाहत दिल से क्यों नहीं निकलती,
जानकर भी सच मेरे दिल,
उसे भूलने की भूल तुम क्यों नहीं हो करती।

कभी सोचता हूँ दिल मेरा,
ख़ुदगर्ज़ी के राह पर क्यों चल पड़ी,
वो प्यार नहीं समझती तुम्हारा,
फिर भी तुम उससे चाहत की उम्मीद कर रही।

शायद सच्चाई कि भाषा,
सच्चे दिल ही समझ पाते हैं,
जिसने दिल पत्थर का किया हों,
वो भला सच्चाई को क्यों समझे।

कुणाल कुमार

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दिल ही तो हैं…

मेरे प्यार की मंजिल,
गुजरती है दिल की गली,
रूहानियत से भरी,
हैं वो एक मासूम सी लड़की।

उसके चेहरे की सादगी,
अहसास उसकी मासूमियत भरी,
दूर रहकर भी वो,
हैं मेरे दिल में बसी।

उसकी हँसी आत्मीयता भरी,
दे दिल को दे शीतलता भरी छाँव,
शायद इसीलिए मेरी अहसास को,
मिला तुम्हारा मासूमियत भरा साथ।

कुणाल कुमार

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मेरी परछाई…

चलते चलते राह मे,
ठिठक कर मैं रुक गया,
आज ना जाने क्यों,
साथ नहीं दिख रही हैं मेरी परछाई।

क्या मैं भूल गया उसे,
या वो भूल गयी है मुझको,
पर ये हक़ीक़त हैं मेरी,
परछाई बिना हैं मेरी ज़िंदगी अधूरी।

मेरी प्रतिबिम्ब ही हैं मेरी परछाई,
मेरी अच्छाई है मेरी परछाई,
मेरी सच्चाई है मेरी परछाई,
मैं ही तो हूँ बन मेरी परछाई।

कहाँ हो तुम क्यों दूर हो मुझसे,
क्या सच्चाई की प्रकाश नहीं पड़ी है मुझपे,
तुम्हें महसूस तो कर रहा दिल,
पर दूर कहीं है अभी मेरी मंजिल।

कुणाल कुमार

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कुछ अल्फ़ाज़…

कुछ अल्फ़ाज़ प्यार भरी,
दिल को देती है सकूँ,
कुछ अल्फ़ाज़ करवाहट भरी,
दिल को चीर कर जाती हैं।

अल्फ़ाज़ मर्ज़ भी दबा भी,
कभी ज़ख़्म दे यादों का,
कभी प्यार दे अहसास भरी,
अल्फ़ाज़ की कही अपने ही समझे।

कुणाल कुमार

Insta: @madhu.kosh

दिल की कही…

तुम पास होती हो,
दिल को सकूँ मिलता हैं,
तुम दूर जाती हो तो?
दिल बेचैन सा दिखता हैं।

सोचता हूँ क्या ये प्यार हैं,
या तुम्हारा मेरे दिल पर किया गया प्रहार हैं,
जो भी हैं ये अच्छा है मेरे लिए,
आख़िरकार ख़्वाब तो हैं अब जीने के लिए।

मुझे मालूम हैं तुम्हारा दिल भी धड़कता है,
मुझे अपना बनाने के लिए मचलता हैं,
पर शायद खुद को तुम औरों के हाथ खो चुकी तुम,
इसीलिए यो प्यार स्वीकारने में तुम्हें डर लगता हैं।

कुणाल कुमार

Insta: @madhu.kosh

तुम कहाँ हो..

तुम कहाँ हो,
ज़रा बता हो दो मुझे भी,
क्यों कतरा रही हो तुम खुदसे,
जैसे कभी प्यार नहीं की तुम मुझसे।

क्या तुम्हारा प्यार हैं इतना कच्चा,
जो कुछ लोगों के कहने से टूट कर बिखर जाए,
मैंने तो साथ बीते हर लम्हे को विश्वास के साथ पिरोया था,
पर धागे के टूटने के साथ प्यार पे मेरा विश्वास बिखर गया।

कुछ कहना था आज मुझे तुमसे,
क्या सुन सकती हो तुम अपने दिल से,
रिश्ता बनाना और तोड़ना हो सकता है आसान,
पर रिश्ते को निभाना ही हैं सच्चे इंसान कि काम।

कुणाल कुमार

Insta: @madhu.kosh